भारतीय शेयर बाजार में आज जोरदार तेजी देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों ने वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय बाजारों में भी उत्साह भर दिया। निवेशकों की मजबूत खरीदारी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 2% से अधिक की शानदार बढ़त दर्ज की गई।
बाजार में सबसे बड़ा ट्रिगर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौता रहा।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिए कि इस सप्ताहांत तक ईरान के साथ समझौता हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो Hormuz Strait दोबारा पूरी तरह खुल सकता है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिलेगी।
इस खबर से दुनिया भर के निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।
शांति समझौते की उम्मीद के बाद Brent Crude Oil की कीमतों में तेज गिरावट आई।
भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह बेहद सकारात्मक संकेत माना जाता है क्योंकि इससे महंगाई और आयात लागत पर दबाव कम हो सकता है।
तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक जोखिम कम होने की उम्मीद के चलते भारतीय रुपये को भी समर्थन मिला।
रुपया शुरुआती कारोबार में:
मजबूत रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जाता है।
जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने की उम्मीद का असर पूरे एशियाई बाजारों में दिखाई दिया।
मुख्य एशियाई इंडेक्स:
वैश्विक बाजारों की यह मजबूती भारतीय बाजार के लिए भी सकारात्मक रही।
आज की रैली में बैंकिंग सेक्टर सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा।
प्रमुख सेक्टर प्रदर्शन:
हालांकि IT सेक्टर में मामूली कमजोरी रही, लेकिन बाकी सेक्टर्स की मजबूती ने बाजार को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा।
बाजार की तेजी केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही।
यह दर्शाता है कि निवेशकों की खरीदारी व्यापक स्तर पर देखने को मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता आगे बढ़ता है और तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो भारतीय बाजारों को आगे भी समर्थन मिल सकता है।
हालांकि निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखनी चाहिए।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, रुपये की मजबूती और बैंकिंग सेक्टर की शानदार खरीदारी ने भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी ला दी। Sensex का 1,700 अंकों का उछाल और Nifty का 23,600 के ऊपर बंद होना निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाता है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।